
इन उजली रातों में कुछ तो सबक है जिंदगी का। एक एक धड़कन कह रही है ,कर रही है इंतजार उसका ,क्या वो आए कब वो आए ,सांस सांस है मेरी वो ,कब और कब का इंतजार ,दर्पण को साफ करती है उसकी यादें अब ,नासूर बन कर कर रही है हराम जीवन ,उज्जवल है और कुछ नहीं देखा है ख्याब उसका ,निर्मोही बनता नहीं मन अब ,लेकिन फिर भी इंतजार के पल कुछ काम हुए ,नाम नही है मेरी विरासत की लकीरें
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