
किसी पर आसक्त हो जाना एक सबसे बड़ा नशा है ,जब किसी पर आसक्ति आती है तो हमें कोई मंजिल नहीं दिखती बस उसी को पाने में लगे रहते है और न जाने वही नशा हमे कहा से कहां पहुंचा देता है बरबादी की कगार पर भी ,सबकुछ गवां देते है हम इस नशे की खातिर
मिल जाती है अगर वो चीज तब भी नशा बना ही रहता है ,और उसमे रम जाने के बाद नशा और बढ़ जाता है
दूसरे में वही नशा खोजने लगते है हम ,बाद में अपने शरीर को और अपने मन को भी कमजोर कर डालते है बाद में पछताते है पर अब क्या हो सकता है
सबका उपयोग करो पर किसी के आदी मत बनो ,नशा मत खोजो उसमे
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