
कौन हो तुम जो मुझे नहीं दिखाई देती बस फिर भी मैं तुम्हारी छुअन का अहसास करती हु
कष्ट आते हैं कांटो की तरह पर तुम फूल और खुशबू बनकर उन काँटों से मेरी हरदम रक्षा करती हो
मेरे मन को निर्मल करती हो मेरे जज्बातों पर नियंत्रण करती हो
कौन हो तुम और मुझसे एकांत मे कुछ कहती हो क्या कहती हो मैं बताऊ सबको की एक तुम हो जो मेरी आँखों मे हरदम समाई रहती हो
टिकने नहीं देती कभी ऐसे लोगो को जो मेरे विरोधी होते है, कुछ हल्का हल्का सा अहसास अपनी बाहों का तुम कराती हो
अभाव नहीं होने पाता जीवन मे मुझे पता नहीं तुम कहाँ से सब साधन मेरे लिए जुटा लाती हो और मुझे बेकार की भौतिक वस्तुओ का ज्ञान कराती हो
कौन हो तुम जो धूप मे भी बादल की तरह मेरे सिर पर छा जाती हो 🌹🌹🙏🙏🌹🌹
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