चरित्र

चरित्रवान व्यक्ति ही समाज,
राष्ट्र व विश्वसमुदाय का सही
नेतृत्व और मार्गदर्शन कर सकता है।

आज जनता को दुनियावी सुख-भोग
व सुविधाओं की उतनी आवश्यकता नहीं है,
जितनी चरित्र की।

अपने सुविधाओं की उतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी की चरित्र की।

अपने चरित्र व सत्कर्मों से ही मानव चिर
आदरणीय और पूजनीय हो जाता है।

चरित्र ही वो खजाना है जो मरने के समय शांति और सुकून की मौत देता है की अब पछताता नहीं है

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