देवदासी भाग 448

जब तक कोई तूफान जीवन मे नहीं आता तब तक सबको जीने का सही तरीका नहीं आता, तूफां ही सिखाता है तरीका नये सलीके और देता है कुछ नए आयाम जिंदगी के

सौम्य सिंह ने कहा की तुम लोग मेरे घर मे चलकर रहो मेरी हवेली मे किसी को कोई कष्ट न होने दूंगा डाकू ने कहा नहीं हम आपपर कोई खतरा नहीं बनना चाहते हम लोग बहुत ही बदकिस्मत है रोटी की तलाश मे जब परिवार गुजर गया तब भूख प्यास सहन नहीं हुई तो एक सड़क के किनारे बैठकर भीख मांगने लगा तभी मेरी डाकुओ के सरदार से मुलाकात हो गई और उसने मुझे दो रोटी खाने को दी और फिर मुझे अपने अड्डे मे ले गया और मुझसे बोला की अब तुम यहीरहोगे तुम्हे खाना मिलेगा बदले म तुम्हे मेरे कुछ काम करने होंगे वरना तुम्हे खाना नहीं मिलेगा क्रमशः

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