
लालचा जाते हैं दूसरो की चीजो को क्यो देखकर अपने आपको जब हम अभावग्रस्त महसूस करते हैं अपने को हीन और छोटा समझते है, अपने कपड़ो को और अपनी वस्तुओ को जब हम बार बार देखते हैं और हम लोगो के सामने जाने मे कतराते हैं
बनावटी चीजे यहाँ तक की लोगो की बनावटी खुशी और मुस्कुराहट को हम समझ नहीं पाते है वो मुस्कुराहट भी हमे सच्ची लगती है
पर जरा पता तो करो उनके दिलों मे झाककर तो देखो उनके सीने मे भी अतृप्त आत्मा छिपी बैठी है सबकुछ होते हुए भी उन्हे अभी बहुत कुछ चाहिए और अभी भी वे संघर्ष कर रहे हैं बहुत कुछ पाने के लिए
हम अपने आप को भी देखे की प्रकृति ने हमे भी बहुत कुछ दिया है सच्ची मुस्कुराहट दी है, सच्ची वस्तुएँ दी हैं सच्चा परिवार दिया है सकरामक सोंच दी है यही क्या कम है 🙏🙏🙏🌹🌹🙏🙏
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