कभी कभी किसी से बहुत नफरत हो जाती है उसका मुह देखने का मन नहीं करता परंतु किसी से नफरत लेकर जिया भी तो नहीं जा सकता ऐसे इंसान से कभी कभी नफरत होती है जो हमारे पास ही वो रहता है और उससे हमारा जीवन भर का संपर्क रहता है और हम उससे बदला लेने की बात , उसका अहित करने की बात भी नहीं सोंच सकते ऐसी हालत मे हमे खुद का मंथन करना चाहिए कि हमारी गलती कहाँ पर थी मेरे साथ ऐसा क्यो किया गया और तब हमे समझ आ जाएगा की शायद अपनी ही गलती थी 🙏🙏
टिप्पणी करे