बोलना और प्रतिक्रिया करना ज़रूरी है, लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चहिए**

कोई हमे कुछ कहता है तो प्रतिक्रिया जरूर हम करते हैं परंतु कभी कभी हमारा संयम टूट जाता है और बात बहुत ही आगे बढ़ जाती है यहाँ तक की रिश्ते नाते तक दाओं पर लग जाते हैं

हमारी सभ्यता जो भी है हमे उसे बरकरार रखना चाहिए असभ्य लोगो से दूर ही रहना उचित होता है न की उनसे बहस करके अपने आपको जलील करना

अगर सही तरीके से बात न बने तो किसी से उलझने की बजाय उससे दूर हो जाना चाहिए या चुप हो जाना चाहिए अपना बचाव करते हुए निकल लेना चाहिये ऐसे लोगो से बात करना, दोस्ती करना या उनके संपर्क मे रहना, जिसमे हमारी सभ्यता और संयम का साथ छुट जाय, उससे दूरी बना लेना ही उचित है

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