भरोसा, जो हर किसी पे नहीं होता हैऔर जब टूटता है इक दफा तो, फिर किसी पर भी नहीं होता है।

विश्वास एक डोर है ऐसी डोर जो हमारे रिश्तों को पिरोकर रखती है ऐसी डोर जो मजबूत लगती है परंतु जब कभी वो मजबूत दिखने वाली डोर टूट जाती है तो हम बहुत ही दुखी हो जाते हैं और इतना दुखी हो जाते है की फिर कभी किसी पर विश्वास करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते

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