खुद को पुकारो एक बार खुद से अच्छा मित्र कोई नहीं

कभी कभी जब मन परेशाँ हो कोई न साथ हो, कितनी बताएंगे किसी को परेशानी अपनी

कोई अपना गुबार निकालने के लिए एकांत मे, और सलाह भी मिले किसी की

जब मन रोने को आतुर हो जाए तो निकाल दो आँसू का जहर कहीं एकांत मे

और फिर देखो हरे भरे वृक्षों को वे भी कितनी पीड़ा सहते हैं एक जगह खड़े रहकर लोग डंडा मारकर तोड़ देते है उनके फलों को

फिर भी वे अपना दुख किससे कहें उत्तर तो मिला न हमे जब हमने खुद को पुकारा

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