अपनी हस्ती कुछ भी नहीं उड़ जाना है एक तिनके की तरह, एक रात की ही तो बात है कल सुबह को किसने देखा है ❤दिन और रात मत करो यारो जो गुजर गया उसे याद करके उसमे न डूबो ❤❤पार करो उस दरिया को जिसमे डूब डूब कर तुम तिल तिल कितनी बार मर चुके हो ❤होश मे रहकर भी तुम कितने बेहोश हो बर्बाद करते हो अपना समय बेवकूफों की तरह ❤
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