रेत के टीले सी है जिंदगी, वक्त की आंधीजर्रा जर्रा उड़ाकर ले जा रही है***मत उड़ ए बंदे, जीवन के सफ़र को सार्थक बना ले**

अपनी हस्ती कुछ भी नहीं उड़ जाना है एक तिनके की तरह, एक रात की ही तो बात है कल सुबह को किसने देखा है ❤दिन और रात मत करो यारो जो गुजर गया उसे याद करके उसमे न डूबो ❤❤पार करो उस दरिया को जिसमे डूब डूब कर तुम तिल तिल कितनी बार मर चुके हो ❤होश मे रहकर भी तुम कितने बेहोश हो बर्बाद करते हो अपना समय बेवकूफों की तरह ❤

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें