।। पंख।।
तुम बेशक काट दो पंख मेरे,
मुझे मेरे हिस्से का परवाज़ नहीं चाहिए।
हो ठंडी काली रात अगर, और साथ में हो बरसात
अगर। मुझे वो गर्म तपिश,का सुकून नहीं चाहिए,
मतलबी है वो सारे लोग, जो कहते हैं चांद तो
चाहिए, पर चांद में दाग़ नहीं चाहिए।
तड़पने दो मुझे इसी दर्द के साथ,
पंख कटे हैं तो क्या हुआ,हौसला नहीं टूटा।
होंगी मेरी मौत जब कभी, मुझे मेरे मौत पर
मेरे लिए रोने की आवाज नहीं चाहिए।
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