मैं करूँ तो क्या करूँ

तुम्हें छोड़कर जी नहीं लगता,
मैं क्या करूं?
तुम्हें पाकर भी चैन नहीं पड़ता,
मैं क्या करूं
तुमने मुझे पागल बना रखा है,
तुम्हें भी पागल न बनाऊं ,
तो क्या करूं?
तुम्हें हसीं आती है मेरे हालात पर,
तुम्हें भी खून के आसूं न रुलाऊं ,
तो क्या करू ?
जी रही हूं जिस तरह,
तुम्हें भी ऐसे जीने के लिए मजबूर न करूं,
तो क्या करूं?

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