कितना आजमाया जाएगा

वफा के नाम पे और हमें कितना आजमाया जाएगा !
प्यार के नाम पर और हमें कितना सताया जाएगा !!
यकीं मानों हम इम्तिहां देते देते अब थक गए हैं !
मिटे हुए को अब और कितना मिटाया जाएगा !!

कोई तो बताए हम क्या हैं और हमारी खता क्या है !
पाक दामन पे क्या- क्या इल्जाम लगाया जाएगा !!
अपना दिल जां, जिगर सब कुछ तो लुटाए बैठे हैं !
तुम ही बताओ इस हाल में और क्या लुटाया जाएगा !!

तुम क्या हो तुम्हारी औकात क्या है हमें सब पता है !
इस हाल में पर्दा डाल के क्या – क्या छुपाया जाएगा !!
कागज के फूलों से कभी भी खुश्बू नहीं आती !
इत्र छिड़क के कब तक झूठ से मन बहलाया जाएगा !!

मेरा यकीं मानो इंसान के बस में कुछ भी नहीं है !
झूठ के सहारे कब तक इंसा को खुदा बनाया जाएगा !!
धर्म के रास्ते चलके भी तो इंसान इंसान नहीं हो पाया !
मजहब के नाम पे और कितना ढोंग रचाया जाएगा !!🌹🌹🌹🌹🙏🏿🌹🌹

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