खतरे की सूचना हमे पहले ही मिल जाती हैं पर हमारे अंदर इतना मेला होता है की हम समझ नहीं पाते

जब मुझे पता चला की मैं माँ बनने वाली हु और मुझे कोई खुशी नहीं हुई और साथ मे मेरे पति भी खुश नहीं थे अभी शादी को तीन महीने हुए थे की मैं गर्भवती हो गई थी

उतने समय घर की स्थिति भी ठीक नहीं थी उनकी नई नई नोकरी थी बड़ी वाली ननद की भी शादी नहीं हुई थी वो भी मुझसे बहुत चिढ़ती थी की उनकी शादी नहीं हुई वो भी खुश नहीं थी

मेरी सास भी डर गई थी की उनके ऊपर एक खर्चा और आ गया था

पति ने कहा चलो इसको साफ करवा देते हैं पर मैंने मना किया की हमारा पहला बच्चा है मैं भ्रूण हत्या नहीं करूँगी भले ही कुछ हो जाए चारो तरफ कलह का माहौल हो गया था

मुझे लगता था की कुछ अच्छा नहीं होने वाला

लेकिन फिर भी मैंने गर्भपात नहीं करवाया और बच्चे को जन्म देने का फैसला किया

आखिर मे सब नाराज हो गए और मुझे मायके भिजवा दिया वहाँ की स्थिति भी ठीक नहीं लेकिन वे लोग खुश थे की उनके घर मे एक नन्हा बच्चा आने वाला था खाने पीने को जो कुछ था मै खाती और उधर ससुराल से कोई संदेश न आता और न कोई मेरा हालचाल लेता अगर हालचाल लेते भी तो वही कहते की अगर बेटी हो गई तो ठीक न होगा ये बेटी ही है इसे तुमने हटाया नहीं

मुझे पता चल गया था की कुछ अच्छा नहीं होने वाला था काश मैंने बच्चे के बारे मे क्यो सोंचा मैंने इसे आने ही क्यो दिया

परंतु वही हुआ जिसका मुझे डर था, सातवे महीने भी नहीं हुए मुझे दर्द शुरू हुआ और मुझे पास के एक nursing home मे admit किया गया एक अपरिपक्व बच्चे का जन्म हुआ वो बहुत मुश्किल से बचा तीन महीने बाद उसे मैं घर ले जा सकी

🙏🏿🙏🏿

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें