जब हम अभावग्रस्त स्थिति मे होते है एक एक पैसे के लिए परेशान रहते हैं खाने पीने को भी नहीं मिलता जो हम चाहते है अब अपने मन को भी कितना मारा जाए इस दुनिया मे कदम रखा है तो दुनिया की वस्तुओ का भोग करने की सबकी इच्छा होती है और अपना भी मन कुछ चाहता है
किसी दूसरे से मांगने के बजाय किसी से छीन लेने के बजाय हम अगर प्रकृति के सामने या तो सूर्य से या चंद्रमा की रोशनी मे अपने आपको समर्पित करके, संसार की बातों को त्याग कर शांत वातावरण मे जब हम पूरे सच्चे मन से सही तरीके से, अपने आचरण को संतुलित करके अगर हम प्रकृति से कुछ भी मांग करते हैं तो निश्चित रूप से प्रकृति हमे कभी भी नहीं ठुकराती है
हम पूजा भी प्रकृति की ही करते हैं और हम प्रकृति से ही प्राप्त सामग्री को देवी देवताओं मे अर्पण करते हैं हमारे इष्ट देव भी प्रकृति से ही उत्पन्न हुए हैं किसी भी मंत्र या ढोंग ढकोसला करने के बजाय हम अगर अपने इष्ट देव की छवि को सूर्य की रोशनी या चांदनी रात्रि मे याद करें तो निश्चय ही समाधान मिलता है हमारा मार्ग खुलता है और हमे शक्ति मिलती है🙏🙏
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