एक दंपति के संतान नहीं थी वे सबके बच्चो को देखते और आपस मे झगडा करते की तुम्हारी कमी के कारण बच्चा नहीं हुआ
पत्नी कहती तुम्हारी कमी थी तुमने अपना इलाज नहीं कराया
पति कहता तुममे कमी थी
एक दिन उनकी कामवाली ने उनका झगडा सुन लिया और बोली की मै आपको बच्चा दे सकती हु आपकी पत्नी तो मायके गई है गुस्सा होकर आपको बच्चा चाहिए आपको मै बच्चा दूंगी आप मुझसे संबंध कायम करिये मुझे पैसे की बहुत जरूरत है मैं आपको बच्चा पैदा करके दूंगी और आप मुझे पैसा दीजिए मैं पढ़ना चाहती हु कुछ करना चाहती हु
आदमी राजी हो गया और उसने हामी भर दी और उसने कहा की मेरा पुराना घर है जो खाली है उसमे तुम और मैं रहेंगे जब बच्चा हो जाएगा तुम अपने पैसे लेना और जब ठीक हो जाना तब चली जाना मैं तुम्हारे खाने पीने का भी प्रबंध करूँगा और तुम्हारा सारा खर्च उठाऊँगा और तुम्हारे पैसे तुम्हारे बैंक मे जमा कर दूंगा पुरा जीवन तुम आराम से रहना
अब दोनों राजी हो जाते हैं और एक मंदिर मे भगवान को साक्षी मानकर भगवान के कुछ फूल अपनी सेज पर डालकर अपनी पहली रात मनाते हैं
और भी कई रातों के पश्चात वो लड़की गर्भवती हो जाती है उसके खाने पीने और रहने का सारा प्रबंध होता है और वो एक बेटे को जन्म देती है और उसे उस आदमी की गोद मे देकर वो अपने पैसे लेकर चली जाती है
अब उसका नाम वरदान रखा
और अपनी पत्नी को वो बुलाने जाता है पत्नी से कहता है ये बच्चा मैंने गोद लिया है एक अस्पताल से ये देखो गोदनामा,
वो दोनो उस बच्चे को पालने लगते हैं अब वो बड़ा हो जाता है
पढ़ने मे बहुत होशियार, तेज बुद्धि का लड़का , एक बहुत अच्छी नौकरी करने लगता है
अब वो एक दिन अपने पिता से कहता है की मैं अब भारत मे नहीं रहूँगा मैं विदेश जाऊंगा वहाँ पर बड़ी तरक्की है यहाँ पर अच्छा रहन सहन नहीं है
और अब दोनो तनाव मे आ जाते हैं कहते हैं की बुढापे के सहारे के लिए इसे लाया था आज ये जा रहा है विदेश इतने चाव से इतने प्यार से इसे पाला पोसा बड़ा किया, पढ़ाया लिखाया आज हम दोनो को अकेला रहना पड़ेगा
अब मेरा इतना बड़ा कारोबार है अब कौन संभालेगा उसने अपने बेटे वरदान से विनती की की बेटा तुम मत जाओ यहाँ तुम्हे क्या दिक्कत है मैंने इतना कमा लिया है की तुम सारा जीवन बैठकर खाओगे मत जाओ बेटा मत जाओ
वरदान ने कहा नहीं पापा मैं आपकी कमाई नहीं खाऊंगा मैं अपनी मेहनत से जो कमाउंगा उसे ही खाऊंगा और कहता है की मुझे विदेशी कंपनी से बुलावा आया है और वो जाने की तयारी करने लगता है
आखिरी मे वो अपने माँ बाप को रोता बिलखता छोड़ कर विदेश चला जाता है अब दोनो पति पत्नी फिर अकेले हो जाते हैं और फिर झगडा करने लगते हैं पत्नी कहती है की अस्पताल से उठाकर लावारिस को उठा लाये थे पता नहीं किसका गंदा खून था वो खुदगर्ज, नामुराद, नजायज संबंध से वो पैदा हुआ लगता था मुझे
उसे हम दोनो से कोई भी लगाव न था उसे केवल अपना कार्य सिद्ध करना था तुम्हारे तो ताकत थी नहीं जो तुम मुझसे संतान पैदा करते
तभी उस आदमी के मुह से निकला नजायज मत कहो उसे वो मेरा और रोशनी का बेटा है
क्या बोले तुम फिर से कहो क्या ये सत्य है तुम इतने गिरे हुए निकले आज से मेरा और तुम्हारा संबंध खत्म और पत्नी भी चली जाती है अब तो विनीत अकेला हो जाता है
बेटा भी चला गया और पत्नी भी चली गई पूरा घर खाली हो गया बस यादें शेष रह गई थी उसकी, इतना आलीशाँ मकान, सुंदर बगीचा जिसमे वो अपने बेटे के साथ खेलता था आज याद कर करके वो बहुत रो रहा था आज वही पत्नी जिसके सुख के लिए उसने क्या क्या नहीं किया वो ही उसे चरित्रहीन कहकर चली गई अब उसने कुछ दिनों के बाद वो घर अपने नौकर को दे दिया और chalaa
चला गया एक दूसरे शहर मे एक छोटा सा किराए का घर लेकर रहने लगा
वो अक्सर एक सड़क पर किनारे एक कुर्सी पर बैठ जाता था और आती जाती गाड़ियों को देखता और रास्ते मे कुछ भी खरीद कर खा लेता था
वो बैठा था रात हो चुकी थी वो बेंच पर ही सो गया तभी एक गाड़ी उसके सामने आकर रुकी और किसी ने उसे पुकारा की ये सोने की जगह नहीं है उठिए
एक पुलिस वाला उसे वहाँ से जाने को कह रहा था विनीत लड़खड़ाते हुए उठा और गिर गया तभी एक महिला उस गाड़ी से निकली और कहने लगी अरे ये तो गिर गए कौन हो आप चला
चलो मैं आपको घर छोड़ दूँ पर विनीत कुछ बोल ही नहीं रहा तभी पुलिस ने कहा की ये पागल लगता है मैडम इसे यही छोड़ कर आप आगे चलिए इसे एक
जगह पर उतार दो, नहीं नहीं इसे मेरे घर ले चलो सेरवेंट रूम मे रख देंगे
बाद मे उसे अस्पताल मे भर्ती कर देंगे यहाँ इन्हे खतरा है अगर इन्हे कुछ हो गया तो मुझपर दोष लगेगा और वो महिला विनीत को अपने घर ले जाती है और बाहर एक खाली कमरे मे एक बिस्तर मे सुला देती है और अपने नौकरो से कहती है इनका ध्यान रखना विनीत सो जाते हैं सवेरा होता है तब विनीत की नींद खुलती है और वो बगीचे मे टहलने लगता है
आज उसे बहुत शांति महसूस हो रही है तभी देखता है की नौकर चाय लेकर खड़ा है और विनीत से कहता है चाय पीने के लिए विनीत एक कुर्सी पर बैठकर चाय पीने लगते है तभी एक गाड़ी मे एक महिला उसे देखकर नीचे उतरती है और अपनी टोपी उठाकर कहती है की अरे मालिक आप एक p
पुलिस अधिकारी उसे मालिक कहती है तो वो हाथ जोड़ता है कहता है साहब मैं जा रहा हूँ आपका बहुत बहुत शुक्रिया अरे मुझे नहीं पहचाना मैं रोशनी हु आपकी नौकरानी भूल गए मालिक अरे रोशनी तुम हो
रोशनी बताती है की आपके पैसों से उसने पढ़ाई की और आज वो पुलिस अधिकारी है मालिक आपने मुझपर बहुत अहसां किया है विनीत रो रो कर
उससे कहता है की मुझे तुम्हारी मदद कर देनी चाहिए थी रोशनी लेकिन तुम्हारे साथ गलत नहीं करना चाहिए था , रोशनी ने कहा की मैंने ही आपको वो सब करने के लिए कहा था आपने कुछ गलत नहीं किया अब आपका बेटा कहाँ है साहब,,,,,,,, विनीत रो रो कर सारी बात बताता है और कहता है की एक सुख के लिए मैं कितना गिर गया था और वो भी मेरा न हो सका अब मै जा रहा हु
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