मेरी समझ से अपनी आत्मकथा मे मैं क्या लिखूँ

कुछ खट्टी सी और कुछ मीठी सी अपनी कुछ यादें किसी के कडवें बोलो को सहते हुए अपने जीवन को गुजारना और अपनी कमजोरी को अपनी बदकिस्मती समझना यही मेरे जीवन का एक अहसास बन चुका

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