लोभ ही हमारे जीवन का एक ऐसा कलंक है जो पूरा जीवन आनंद से नहीं बिताने देता
अब एक नौकरी मिलती है तो अब बड़ी नौकरी की कामना करते हैं
अब दूसरी अच्छी नौकरी मिली तो अब उसमे भी संतुष्टि नहीं अब पैसे कम है कुछ दिनों बाद पैसे मिले तो बैंक में ज्यादा जुड़ने चाहिए उसके लिए थूंक लगा लगा कर पैसा जोड़ रहे है पैसों का लालच कम ही नहीं हो रहा है
अब घर खरीद लिया अब ये छोटा है सामान भी कम पड़ गया आज ये लेना है अब पलंग हैं अब सोफा चाहिए
अब टेलीविजन और फ्रिज होना चाहिए
अब गीजर और ac भी होना जरूरी है अब
अब कार चाहिए
अब माता पिता की संपत्ति मे हिस्सा चाहिए मां बाप को तंग कर रहे हिस्सा बंटवा रहे
पूरा जीवन लालच मे ही खत्म हो जाता है आखिरी मे चिंता हो गई की अब ये सारी संपत्ति जो जोड़ी है किसके नाम लिखूँ 😄😄😝😝
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