हाथों की लकीरें तो है बस लकीरें
मन को उलझाने की सुन्दर ज़ंजीरें
जानना चाहता है हर कोई अपनी तक़दीर
लकीरें दिखा रही ज़िन्दगी की अद्भुत तस्वीर
कामयाबियों ने जब दिया ना साथ
तो इन लकीरों में उलझकर रह गया इन्सान
मिले कहीं कोई छोटी सी आस कोई उम्मीद का दीया
नाच उठा मन ख़्वाबों को मिलेंगे पंख बस हथेलियों ने कह दिया
दिशा विहीन करने में कहाँ जाना है दूर
चंद बातें हाथ पकड़कर रोटी रोज़ी से हर कोई मजबूर
उद्यमी बनकर जीता जा सकता है हर मुक़ाम
लकीरें भी कहती हैं तू चल हम है तेरे साथ
क़िस्मत तो उनकी भी देती है साथ
हालातों में घिर कर जो खो देते हैं अपने हाथ
ये हाथ ये लकीरें विधाता की है सुन्दर संरचना
मंज़िल चूमेगी तेरे कदम बस मेहनत से कभी नहीं बचना🙏🏿🌹🌹🌹🌹🌹
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