दिन यूं ही गुजर जाते, कुछ पूरे
कुछ अधूरे काम रह जाते
पर सोचना यह है कि अभी पूरी रात बाकी है
मंजिल से मुलाकात बाकी है
कभी गफलत में न रहना की रात
सिर्फ सोने के लिए होती है
क्योंकि थकान से अक्सर विश्राम की
यही बात होती है
रात में सपने बुनो पर खुली आंखों से
ठान लो कि सोना कम जागते ज्यादा रहना है
न आने दो नाकामी को दहलीज पर
कामयाबी से इसका कोई मुकाबला नहीं
कैसे मान ले कि
हमारे इस सफर का कोई अंजाम न होगा
सुस्त पड़े कदमों में कभी रफ्तार न होगा
सोचो यह कि
जो मुश्किल राहों को आसान कर दे
ऐसा कोई नाम तो होगा
जिससे हौसले को उड़ान मिले ऐसा
कोई इंतज़ाम भी होगा।।
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