अमीरी झेली
गरीबी मे पली
एक जिंदगी छोड़ चुकी थी वो
कह रही थी चीख चीख कर
अपनो ने ही उसे जीते जी भी खूब जलाया
मसला रौंदा
और अब कितने सम्मान से
अकेले ही रात मे जलने के लिए छोड़ गए
अमीरी झेली
गरीबी मे पली
एक जिंदगी छोड़ चुकी थी वो
कह रही थी चीख चीख कर
अपनो ने ही उसे जीते जी भी खूब जलाया
मसला रौंदा
और अब कितने सम्मान से
अकेले ही रात मे जलने के लिए छोड़ गए
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