जल रही थी एक चिता

अमीरी झेली

गरीबी मे पली

एक जिंदगी छोड़ चुकी थी वो

कह रही थी चीख चीख कर

अपनो ने ही उसे जीते जी भी खूब जलाया

मसला रौंदा

और अब कितने सम्मान से

अकेले ही रात मे जलने के लिए छोड़ गए

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें