
कही बेबसी है
कहीं लाचारी है
कुछ परेशानी है
अपनो पर संदेह
गैरों से प्रेम है
प्रेम मे भी स्वार्थ है
किसी का ना संग है
न किसी का साथ है
लड़ रहे हैं लोग न जाने किस बात के लिए
सब द्रश्य है सब द्रष्टा है
किसी के हाथ मेहंदी से रचे
किसी के हाथ अभी भी सूने हैं पड़े
किसी ने अपने को खो दिया
कोई अपने ख्व़ाबों को
टूट कर बिखरते देखता है
कोई बिना कुछ किये ही पा लेता है
कोई किसी के सपनो पर अपना बाग सजा लेता है
कोई किसी की खुशी के लिए अपने बाग उजाड़ लेता है
कहीं खुशियों की बारात है
कहीं गमों की सजती बारात है
इधर शादी की बारात जा रही
उधर किसी की मैयत जा रही
कही सजता है बाजार
सेकडों बेटियां खड़ी हैं रास्ते मे बिकने के लिए
कहीं दहेज के लिए बहू प्रताड़ित हो रही
कहीं किसी की बेटी की पैसों के लिए होली जल रही
कहीं किसी का बेटा बेरोजगार है
कोई गरीब अपने बीमार बच्चे के लिए करता कुछ पैसों की गुहार है
अब दिल लगता नहीं तेरे संसार मे मेरे मालिक, अब सहा जाता नहीं दुख दूसरों का
मुझे ऐसी शक्ति दे जो मैं निस्वार्थ सबका दुख दूर कर सकूँ ❤❤❤❤
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