उदासीन कुछ भी नहीं सब कुछ अनमोल

जो कुछ भी है पर्याप्त ही है जो मिला है उसका कोई मोल नहीं

जो पाया है उसका कोई जोड़ नहीं

उस भीड़ मे चलने से एतराज करो जिसमे बहुत कुछ पाने की होड़ लगी है

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