चलते चलते वे सबको एक पहाड़ी पर ले जाती हैं और कहती हैं की शायद तुम लोग यहाँ पर आए हो कभी अगर तुम सरदार के आदमी हो तो कुछ याद करो और हमे बताओ तो क्या तुम सचमुच सरदार के आदमी हो
सरदार से हमारी रोजी रोटी चलती है हम अपनी सब्जी अनाज सरदार के यहाँ बेंच देती हैं और बदले मे वे हमे पैसे देते हैं उसमे हमारा परिवार पलता है
अरे हम तुम्हे धोखा नहीं देंगे
हमे एक बार उनके अड्डे तक पहुंचा दो हम इसको उनके सुपुर्द कर देंगे और तुम्हारी सब्जियां अनाज के लिए एक अच्छा ग्राहक भी दिलवाएंगे
कृमशः

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