और वो महिलाएं आराम से चलने लगती हैं उन महिलाओ के बीच मे वीर सिंह का आदमी भी लकडियं सिर मे रखकर चल रहा होता है
आगे बढ़ती है और बार बार चर्चा करती हैं की देखा कैसे बेवकूफ बनाया उन्हे
सब मोटी बुद्धि के थे अपने आपको बहुत ही चालाक समझते थे हम लोग पहले अपने घर जाएंगी
बाद मे वहाँ से फल सब्जी लेकर अड्डे पर जाएंगी
लेकिन पीछे देखती रहना कही उनमे से कोई हमे देख तो नहीं रहा है वो लोग हमारे सरदार के शत्रु लगते थे मुझे उनपर पहले ही संदेह था चलो अब जल्दी चलो मै फल ले लेती हु तुम लोग आगे चलो मै अभी आई और हाँ होशियार रहना उन लोगो से क्रमशः

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