अकुचाती, सकुचाती, लजाति हुई महिला अपने सिर पर घूँघट रखे लकड़ी का ढेर लिए
आती हुई, मटक मटक कर चलती हुई
उसे देखकर एक महिला ने कहा अरे तु कोंन है री
उसने कहा पतली सी धीमी आवाज मे
मै सरदार के अड्डे मे लकड़ी बेचने जाती हु
अगर नहीं ले चलना अपने साथ तो मै दूसरे रास्ते से चली जाऊंगी बहन वैसे तुम्हे मै अक्सर देखती हु तुम लोग टोकरी लेकर जाती रहती हो सरदार के पास
और हाँ वहाँ पर पति पत्नी भी है जो सरदार के कब्जे मे हैं सारे डाकू उनपर नजर रखते हैं
शायद अभी सरदार कहीं गए हुए हैं किसी खजाने को लूटने
मुझे सब पता है सरदार तुम सबसे बहुत खुश है
मै तो उनके लिए सुंदर लड़की का भी इंतजाम करती हु मनोरंजन के लिए आज भी एक लड़की देखी है सरदार के लिए पर सरदार तो है नहीं
ठीक है तुम लोग जाओ मै चली जाऊंगी उनके अड्डे तक अकेली, अक्सर तो जाती हु
सारी महिला उसे आश्चर्य से देखती हैं और वो जाने भी लगती हैं
कहती हैं की अच्छा चल मेरे साथ ही चल अब रोज यही से चलेंगे
और एक पंक्ति बना कर सब चलने लगती हैं
बिल्कुल घने जंगल के बीच पहाड़ी से होते हुए एक सुरंग मे घुस जाती है बहुत ही लंबी सुरंग थी सब चलती है और एक मार्ग पर निकल पड़ती हैं
क्रमशः

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