
डरी थी मैं थोड़ा ,जब खुद को था
अकेला पाया
पर इस अकेलेपन ने मुझे,
मुझसे मिलवाया
जो न करती थी कभी अपनी व्यस्तताओं
में ,वो है अब मैंने कर पाया
अकेलापन मेरा दोस्त बन कर है आया
इन तन्हाइयों में मैंने कलम से
दोस्ती को भी आजमाया
क्या खूब साथ दिया इसने, खुश
हूँ जबसे इसका साथ है पाया
दोस्ती करोगे अपने आप से तो जानोगे ,
स्वयं से अच्छा साथी कोई न बन पाया
इन तन्हाइयों ने मुझे ,मुझसे
है मिलवाया
न तकती हूँ किसी के समय के लिए अब ,
सब व्यस्त हैं यहाँ वक्त किसे मिल पाया
व्यस्त हूँ तब से,अकेलापन मेरा रहबर
बन कर है आया ,खुद से ही मैंने
इश्क फरमाया….😔🙏🏽😔
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