पुरुष रोते हैं ?
पुरुषों को रोना ही चाहिए,
बिल्कुल किसी अबोध शिशु की भाँति फफक फफक कर ताकि स्त्री समझ सके की पीड़ाओं को पुरुष भी उतना ही अनुभव करता है जितना इक स्त्री…!
पुरुष रोते हैं ?
पुरुषों को रोना ही चाहिए,
बिल्कुल किसी अबोध शिशु की भाँति फफक फफक कर ताकि स्त्री समझ सके की पीड़ाओं को पुरुष भी उतना ही अनुभव करता है जितना इक स्त्री…!
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