पुरुष रोते नहीं फफक कर, सहते हैं हरेक पीड़ा

पुरुष रोते हैं ?
पुरुषों को रोना ही चाहिए,
बिल्कुल किसी अबोध शिशु की भाँति फफक फफक कर ताकि स्त्री समझ सके की पीड़ाओं को पुरुष भी उतना ही अनुभव करता है जितना इक स्त्री…!

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें