डरना क्या पीड़ाओ से

दर्द का सिलसिला हर समय नहीं रहता

जब मौसम एक सा नहीं रहता

कभी सर्दी कभी गर्म हवा हमे झकझोर देती है और हम उनसे निपटने का कोई न कोई तरीका निकाल ही लेते हैं

उसी प्रकार जब मन मे कोई पीड़ा उठती है

बेचैनी, अनिंद्रा, कही भी मन न लगना

तो जब पीड़ा असहनीय होती है तब हम उसमे भी कोई न कोई रास्ता, एक अंधेरे मे कुछ प्रकाश की भाँति खोज ही लेते हैं और एक प्रकाश खुलता ही जाता है और हम अपने रास्ते मे सारी पीड़ाएं सहते हुए खुद ही मरहम लगा कर आगे की राह पकड़ते हैं🙏🙏🙏😔😔🙏🙏

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