रात की तयारी होने लगती है सारी खाने पीने की तयारी हो चुकी हैं पकवान बन चुके थे
अब चंद घंटो मे चंद्रमा को अघ्र देने का समय आने वाला था
रिंकी भी खुश थी रिंकी अपने पति से फोन मे बात कर रही थी
अपने पति को whatsapp मे आने के लिए कह रही थी
रिंकी आज अपने मायके मे करवाचोथ का व्रत कर रही थी ये उसका मायके मे पहला व्रत था
उधर प्रीति भी आज घर आने के लिए कोशिश कर रही थी
रघु भी इधर उधर घूम रहे थे
रूपा भी आज खुश थी रिंकी के आने से
सुनीता भी आज खुश थी
पापा जी सबके लिए आज गजरा लाए थे सबको एक एक गजरा देते है
रूपा को एक गजरा देते हैं तो सुनीता जलन से कहती है की बांध दो बालों मे रूपा के, लगा दो बालों मे
प्रकाश कहते हैं की हाँ हाँ जरूर जरूर और कहते हैं रिंकी बेटा यहाँ आना जरा
रिंकी कहती है आई पापा जी थोड़ा सा काम बाकी है अभी
अरे बेटा यहाँ तो आओ गजरा लाया हु
रिंकी भागती हुई आती है और गजरे देखकर बहुत ही खुश होती है कहती है पापा जी इतने सुंदर गजरे लाये हो
हाँ लो मैने रूपा को दिया है तुम दोनों एक दूसरे के लगा देना क्रमशः 🌹🌹

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