सब तयार होती हैं रूपा भी तैयार हो रही है, रिंकी भी रूपा को सजा रही है
अपने लाये गए कपड़ो को रूपा से पहनने के लिए कहती है
उधर रघु भी बालकनी मे खड़ा हुआ है और आसमां की तरफ देख रहा है तभी वो रूपा को नीचे से निकलता हुआ देखता है रूपा के लम्बे खुले और घने बालों को देखता है रात मे कितनी प्यारी लग रही थी रूपा
अब वो रूपा को नजदीक से देखना चाहता है वो चाहता है की रूपा कुछ देर तक वहाँ खड़ी रहे परंतु ये क्या
रूपा तो एक ही मिं मे आँख से ओझेल हो गई
प्रीति भी तयार हो रही थी
वो प्रीति को देखता है प्रीति का गोरा रंग लाल साडी मे फुट फुट कर निखर रहा था वो प्रीति को नजदीक से देखता है और प्रीति से कहता है की मम्मी गजरा दे गई हैं लाओ मै लगा दूँ
पर प्रीति कहती है की मै लगा लुंगी वो इस तरह रघु से बात करती है की जैसे वो रघु से ऊब गई हो और झटकते हुए अंदर चली जाती है
तभी किसी का फोन आता है प्रीति बहुत खुश है वो रघु से कहती है की मेरा प्रमोशन हो गया है अब मुझे कंपनी की तरफ से घर और गाड़ी मिलेगी और पैसे भी अच्छे मिलेंगे आखिर मेरी मेहनत रंग लाई और
क्रमशः

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