और सुनीता चिढ़ते हुए गजरा उठा लेती है और एक गजरा प्रीति के कमरे मे ले जाती है प्रीति को आवाज देती है
प्रीति प्रीति कहाँ है तू
रघु कहता है की अभी वो ऑफिस से नहीं आई माँ
वो भूखी प्यासी ऑफिस गई है इतना काम है उसे
आठ बजे चंद्रमा निकलने को है अब सिर्फ दो घंटे बचे हैं
खैर ये गजरा रख लो उसके बालों मे लगा देना तुम अपने हाथ से
पापा जी लाये थे आज सबको दिया है गजरा हर साल लाकर देते हैं वो
तभी गाड़ी की आवाज आती है प्रीति गाड़ी से उतरती है बहुत जल्दी मे थी वो
वो अंदर आती है पर वो सुनीता की तरफ ध्यान नहीं देती और अपने कमरे मे चली जाती है और वहाँ जाकर कोल्ड ड्रिंक पीने लगती है एक गिलास मे डालकर
कहती है की आज सारा दिन परेशानी मे रही मै
सारे व्रत महिला के लिए ही बनाये गए हैं एक तो भूख लगी थी दूसरे पूजा का बंधन भी आज शादी के तीन साल हो गए मेरे
तभी अचानक सुनीता कमरे मे आ जाती हैं तबतक प्रीति गिलास छिपा देती है
और कहती है अरे मम्मी जी मैने तो आपको देखा ही नहीं माफ करना मै बहुत जल्दी मे थी ऑफिस के काम से फुर्सत नहीं मिल रही थी
सुनीता कहती है की कम से कम आज तो ऑफिस न जाती
प्रीति कहती है मम्मी जी प्रमोशन होने वाला है अगर नहीं जाऊंगी तो प्रमोशन रुक सकता है मुझे रोज ही जाना पड़ेगा अभी
अच्छा अच्छा अब पूजा की तयारी करो मैने सबकुछ बना लिया है तुम जल्दी से नहा धोकर तयारी मे लग जाना
पैरों मे रंग लगा लेना अरे तुमने मेहंदी भी नहीं लगाई
मेरे पास भी नहीं आई कल मेहंदी लगवाने मै इंतजार करती रही कल भी तुम घर देर से आईं
मम्मी जी बहुत काम रहता है प्रीति ने कहा अब तो रात मे भी काम करना पड़ता है
अच्छा मै गजरा यहाँ रख देती हु और वो गजरा रखने लगती है तो देखती है की पलंग के पीछे एक जुठा गिलास रखा हुआ है वो गिलास उठाती है तो उसमे कोल्ड ड्रिंक लगा था वो समझ जाती है की प्रीति व्रत नहीं कर रही
और सुनीता कहती है की अच्छा मै जाती हु जैसी तुम्हारी मर्जी वैसा करो तुम मै अब चली
वो जाने लगती है तो वो ठंडी सांस भरकर कहती है की क्या ढकोसला है ये 🌹🌹 क्रमशः

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