जीवन मे इछाओ का जन्म तो स्वाभविक ही होता है संसार की वस्तुओ को देख कर मन मे उन्हे पाने की इच्छा उठती है आखिर हम सब संसारी ही हैं
कोई भी वस्तु की अगर इच्छा उठे तो उसे एक समय पर पा लेना ही बेहतर होता है अगर धन की इच्छा है तो जवानी मे ही मेहनत करके उसे कमाना है और अपनी कमाई का भोग करना है सही दिशा मे
बुढापे मे पैसा क्या होगा हम क्या भोग कर सकते हैं
खाएंगे भी कैसे दांत, शरीर योग्य नहीं रहेगा
पहनेंगे भी क्या शरीर की रूपरेखा ऐसी हो जाएगी की कुछ खुद को भी अच्छा न लगेगा
अगर समय पर वो वस्तु नहीं मिलती तो हमे इच्छा का fpfo त्याग करना चाहिए
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