मुट्ठी मे सिर्फ धूल ही धूल है अपनी मुट्ठी तो खाली होगी

हम बेकार की बात सोंचते हैं की मेरे पास धन है और भी बहुत सी ऐसी वस्तुएँ है जो किसी के पास शायद ही हो

परंतु एक बार तो सोंचो क्या वे सब वस्तुएँ हमारे पास सदा रहती हैं

सब एक दिन शून्य मे विलीन हो जाती हैं शून्य से पहले कुछ भी नहीं होता

हमारे पास तो केवल धूल ही धूल है मुट्ठी मे और हम वही धूल अपने माथे से सुबह लगाएं तो वही धूल हमारा उचित मार्ग दर्शन करेगी 🌹🌹🌹

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