15 साल की लड़की एक गाँव मे रहती थी
माँ बाप खेती करते चार भाई और तीन बहन
बहनो मे दूसरा नंबर
सबसे ज्यादा चंचल
खेलती
हंसती नाचती गाती
माँ बाप कहते अब तु सयानी हो गई है बाहर मत निकल
तेरी शादी कर देंगे
तुझे देखकर गए हैं पसंद भी कर लिया
वे लोग भी काम करते हैं हम लोगो से ज्यादा कमाते हैं
अपना घर, पक्का
दुकान लड़का अकेला
तीन बहने
सबकी शादी हो चुकी सबसे छोटा
पर वो अल्हड़ लड़की किसी की बात नहीं मानती
सबके खेतो मे घूमती, गन्ना और सब्जी तोड़ कर खाती हुई आती
एक दिन एक जमींदार के लड़के ने उसे देख लिया
अकेली है, कुछ पगली सी
अल्हड़, थोड़ी सी बात पर हंसने वाली
गालों पर गड्ढे पड़ते
खुले लंबी बाल
उसकी हंसी मे फूल झरते
गुलाबी होठ
कालि आँखे
दोनों उभार जैसे
उफ्फ् आजतक ऐसी सुंदरता कहीं नहीं देखी थी रज्जु ने
Paag
पागल हो गया था वो उसके लिए उसके फटे हुए कपड़े देखकर सोंचता की वो गरीब है उसे कुछ कपड़े खरीद कर दे दूंगा कुछ उपहार दे दूंगा और बस एयश करूँगा अपनी टेकड़ी पर ले जाकर
घर की नौकरानी बना कर
रख लूंगा
काम भी करेगी और,,,,, वो मुस्कुरा देता अब जब वो
नन्ही अपने रास्ते से गुजरती तो वो उसके रास्ते मे आकर कहता नन्ही नन्ही बस मुस्कुरा कर भाग जाती
अरे
रुक रुक देख तेरा क्या गिर गया उठा ले
लेकिन नन्ही रुकने का नाम ही नहीं लेती थी रज्जु
ने सोंचा की नन्ही ऐसे नहीं रुकेगी
फिर नन्ही वहाँ से अगले दिन गुजरी रज्जु ने एक पैकेट मे कुछ कपड़े निकाल कर दिये और कहा की अब से ये कपड़े पहन कर आना ये कपड़े तेरे ऊपर अच्छे नहीं लगते पर ये क्या नन्ही तो फिर ha
हंसती हुई भाग गई कपड़े लेने तो दूर उसने कपड़े देखे तक नहीं अब क्या होगा
अब नन्ही ने ये बात अपने घर मे बता दी उसके भाई बहुत खुश हुए सोंचने लगे की अब तो पैसा भी nhi
नहीं लगेगा और नन्ही जमींदार के घर नौकरी पा जाएगी सारी जिंदगी वही रहेगी इसकी शादी मे एक खेत तो
बिकने से बच जाएगा अब उसकी भाभी ने कहा की नन्ही उसके दिये कपड़े तुम पहन लेना वो तुम्हे कपड़े देता है
Usk
उसके कपड़े तुम ले लेना वो कोई गलत आदमी थोड़ी न है और ये सोंचकर नन्ही ने रज्जु के दिये हुए कपड़े ले लिए और उन्हे पहन लिए वे कपड़े उसके
ऊपर बहुत जंच रहे थे अब उसने सोंचा की अबकी बार एक बाग मे बेर लगे हैं अमरूद भी लगे हुए हैं चलो आज तोड़ूंगी अब रज्जु वाले रास्ते मै नहीं जाऊंगी वहाँ केवल गन्ने के खेत हैं मै अब गन्ना नहीं खाऊँगी अब नन्ही नये कपड़े पहनकर अमरूद और बेर वाले रास्ते मे जाने लगी वहाँ pa
एक नीम का बहुत बड़ा पेंड था उसके चारो तरफ अमरूद, बेरी के पेंड भी थे कुछ सब्जी भी लगी थी सुंदर सुंदर फूल लगे थे, तितलियाँ, तोते, चिड़ियाँ, मैना भी थी जो पेंड पर बैठी थी शायद वो मैना उस पहलवान ने पाली थी जो उससे बार बार कुछ कह रही थी
उस नीम के पेंड के नीचे एक पहलवान कसरत कर रहा था नन्ही छिप कर देखने लगी अब
कृमशः
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