नन्ही पहलवान को खूब गौर से देख रही थी की वो किसी तरह मुग्दर् चला रहा था
किस तरह कसरत कर रहा था
बगल मे उसका नाश्ता भी रखा था एक बाल्टी दूध, एक दर्जन केले 6 रोटी मोटी मोटी मक्खन लगी हुई और एक ढेला गुड़ रखा था
नन्ही उसे देख रही थी परंतु पहलवान को मालूम नहीं था की कोई उसे देख रहा है
नन्ही तो तीन चार दिन से उसे लगातार देख रही थी
और वो अपनी चुन्नी मे कुछ अमरूद और कुछ पके हुए बेर तोड़ कर रखे हुई थी
उसे पहलवान का कसरत करना, रोटी खाना, बाल्टी मे मुह लगाकर दूध पीना केले खाना बहुत अच्छा लगता
और मे वो भी घर जाकर उस पहलवान की नकल उतारती
पर वो उतना कैसे खाती जितना पहलवान खाता था पर वो भी एक मोटा डंडा लेकर पहलवान की तरह ही कसरत करने लगी
इतने मे पहलवान की मैना बोली गबरू ही ही ही ही और हँसे जा रही है
गबरू ने पीछे मुड़ कर देखा की उसकी लंगोट खुली हुई है
अब गबरू गुस्सा होकर मैना के पीछे एक पतली सी डंडी लेकर दौड़ा रुक अभी बताता हु तुझे बदमाश कहीं की
इतने मे पहलवान को देखकर नन्ही अपनी हंसी न रोक सकी और वो भी हंसने लगी
अब पहलवान रुक गया वो नन्ही की तरफ देख कर एक मिं के लिए सोंच मे पड़ गया की ये लड़की यहाँ कैसे आ गई क्रमशः 🌹🌹
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