वीर सिंह छिपे रहते हैं और इस महिला को देखते हैं उन्हे देखते ही वो महिला अपना घूँघट उठा देती है और इशारा करती है की वो उनका आदमी है जो महिला के कपड़ो मे है और इशारा करती है की वो अब अंदर जाएं
वीर सिंह अंदर गुफा मे जाते है वहाँ पर डाकुओं के कपड़े रखे हुए होते हैं
वे डाकू के कपड़े पहन लेते हैं और एक सिर पर कपड़े की पगड़ी बना कर आगे चलने लगते हैं इतने मे एक डाकू कहता है की ए
वीर सिंह कहते हैं हा बोलो
डाकू कहता है की वहाँ पर कपड़े धोने को पड़े हैं जरा तुम अंदर जाकर उस आदमी से कहो की वो कपड़े धो डाले वरना रात मे उसे और उसकी पत्नी को खाना नहीं मिलेगा भूखे सोना पड़ेगा
अब वीर सिंह को तो पता नहीं ये किस आदमी की बात कर रहा है
वीर सिंह कहते हैं की वो आदमी वहाँ नहीं है जहां तुम कहते हो
तब वो आदमी कहता है की उस गुफा मे दोनो रहते हैं तुझे नहीं मालूम
मालूम है पर वो लोग वहाँ नही हैं
क्या बोलता है तू डाकू बोला और वीर सिंह को एक गंदी गाली देने लगा वीर सिंह एक ठाकुर थे वे गाली बर्दाश्त नहीं कर सकते थे अब वे बदला लेने की सोंचने लगे उनका जी चाह रहा था की वे उस डाकू को पहाड़ी के नीचे गला दाब कर फेंक दें परंतु उन्हे अपने आपको अभी काबू मे रखना था वे अपनी मुट्ठी को भींच लेते हैं क्रमशः🌹🌹

टिप्पणी करे