कल्लू अब बक्सा लेकर चलने लगते हैं तभी उन्हे सुधा मिल जाती है कहती हैं की सावधानी से जाना छोटी बच्ची है कुछ पैसों की जरूरत हो तो जरूर बताना हमें
तभी सुधा की माँ आ जाती हैं और वो एक पोटली मे कुछ सामान लिए होती हैं कहती हैं की चलो मै बहू के पास चलती हु और वो कल्लू के साथ ही चल पड़ती है
कल्लू क्लॅनिक जाते हैं तो देखते हैं की बिटिया नीलू की गोद मे खेल रही है बहुत खुश हैं सब
सुधा की माँ को देखकर मौसी उठ जाती हैं और सुधा की माँ को बैठाती हैं कहती हैं जिज्जी अगर तुम न होती तो हम कही के न होते
कल्लू बक्सा वही रखते हैं और कहते हैं की अब रिक्शा खोज लाऊँ जल्दी से तुम लोगो को सुरक्षित घर पहुंचा दूँ मै अभी आया क्रमशः

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