रघु के सामने प्रीति भी शीशे मे अपने रूप को निहार रही थी बार बार अपने बालों को चेहरे के सामने लाती और मुस्कुराती
रघु भी तिरछी निगाह से प्रीति को देख रहा था प्रीति उसे देखकर किस तरह मुह बनाती है और अपने दूसरे कमरे मे निकल लेती है
रघु सोंचता है की शायद वो प्रीति के योग्य नहीं रहा क्रमशः
रघु को देखकर प्रीति अजीब सा मुह बनाकर वहाँ से झटक कर उठ जाती है
रघु कुछ नहीं कहता वो प्रीति के हाव भाव को समझ

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