शादी का असली मतलब 259

रघु के सामने प्रीति भी शीशे मे अपने रूप को निहार रही थी बार बार अपने बालों को चेहरे के सामने लाती और मुस्कुराती

रघु भी तिरछी निगाह से प्रीति को देख रहा था प्रीति उसे देखकर किस तरह मुह बनाती है और अपने दूसरे कमरे मे निकल लेती है

रघु सोंचता है की शायद वो प्रीति के योग्य नहीं रहा क्रमशः

रघु को देखकर प्रीति अजीब सा मुह बनाकर वहाँ से झटक कर उठ जाती है

रघु कुछ नहीं कहता वो प्रीति के हाव भाव को समझ

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