कुछ ऐसा भी वक़्त आता है कुछ परिस्थिति ऐसी भी बन जाती है की किसी को अपने दिल से ना चाहकर भी निकालना पड़ता है
तु रुसवा न हो जाए जमाने मे कितनी उल्फत है तुझसे मेरे दिल के पैमाने मे
खाली हो जाती हैं दिल की हसरतें जब तेरा मासूम सा चेहरा सामने आता है
दोष नहीं तेरा कुछ सब तकदीर का खेल है, ए नादान दिल तु जिसे अपना समझ रहा है वो तो एक खेल था
तेरे वीराने को रोशन किया मैने आज तु कहता है अंधेरा उसे वादा किया था तूने न कभी जाने का
चल दिया किसी अंजान राहों मे बिना बताये
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