उम्र का वो पड़ाव होता है किशोरा वस्था
बेहद संवेदनशील पड़ाव
उस पड़ाव मे जीवन मे अजीव अजीब परिवर्तन होते हैं
शरीर मे भी बहुत तेजी से परिवर्तन होता है एक लड़की के शरीर मे उत्तेजना, भावुकता, लचीलापन
वैसे ही मै भी उस पड़ाव से होकर गुजर रही थी
शरीर मे अजीव परिवर्तन वो परिवर्तन अचानक आ जाने से दिल मे घबराहट
बहुत जल्दी किसी से डर जाना
किसी का आँखे गड़ाकर देर तक मुझे निहारना अच्छा तो लगता परंतु एक अजीब सी उलझन मे पड़ जाती की
ये शख्श मुझे इस तरह क्यो देख कर चल रहा
किसी की आवाज पर ध्यान केंद्रित हो जाता था
किसी लड़के की कद काठी और उसकी हंसी देखकर मै भी किसी के प्रति पहली बार आकर्षित हुई
मै रोज अपने बालों को सुबह सुबह खोल लेती थी क्योकि घर की बड़ी बूढ़ी कहती थी की धूप लगने से बाल मजबूत होते हैं
मै रोज जल्दी नहा लेती मुझे सिर से नहाना बहुत अच्छा लगता मुझे सुगंधित वस्तुएँ लगाना बहुत अच्छा लगता मै अक्सर चमेली का तेल लगाया करती थी
मुझे लिपस्टिक लगाना बेहद पसंद था मै लिपिस्टिक लगाकर अपने बालों को खोल कर मुह मे पाउडर लगा कर अपने आपको शीशे मे देखती थी
रोज 9 बजे स्कूल जाती मेरी उम्र 16 साल
अब एक लड़का मुझे रोज देखने आता था मै भी उसे देखती देखती जाती अब ये मत सोंच लेना की वो मेरा पहला प्यार था
मै भला क्यो किसी से प्यार करूँगी
मुझे उसका देखना बहुत अच्छा लगता
एक दिन मै अपने बाल खोले लिपिस्टिक लगाए खड़ी थी
मेरे पास तो लिपिस्टिक थी नहीं मम्मी की चोरी करके लगा लेती थी
गुलाबी सलवार खुले बाल सफेद कुर्ता, गुलाबी दुपट्टा उपर से लिपिस्टिक, पाउडर और मेरे खुले घने बाल
अब मै उसका इंतजार कर रही थी की वो अभी तक मुझे देखने नहीं आया मुझे उसका लंबा कद, सावला रंग उपर से उसके घने बाल छोटे छोटे और फिर वो जब मुझे देखकर अपनी बट्टीसी निकालता तो मै अपने ऊपर गर्व करती की मै बहुत हसीन हु
आज रविवार भी था उसकी भी छुट्टी थी अब वो बड़ी देर से आया मेरा मुह उसके इंतजार मे सूख गया था उसे साइकिल से आता देखकर मेरा मुह लाल हो गया
वो मुझे साइकिल से देखता हुआ अपनी बत्तीसी निकालता चला जा रहा था रास्ते मे एक बिजली का पुराना खंभा था वो उसी से टकरा गया
साइकिल उधर गिरी और उसके काफी चोट आ गई थी अब मै जल्दी से उसके पास पहुंची और उसे उठाने लगी उसने कहा
तुम घर जाओ
मुझे हाथ मत लगाओ
और मै दूर खड़ी रही उसे देखती रही वो अपनी साइकिल छोड़ कर जाने लगा तभी उसके एक दोस्त ने इसे सहारा दिया और उसके घर पहुंचा आया
उसे चोट आ गई थी मुझे पता चला की वो अभी 8 दिन तक सामान्य नहीं हो पाएगा
मुझे सारा दोष खुद पर दिखाई दिया मै आज भी अफसोस करती हु की मेरे कारण उसे चोट आई न मै लिपिस्टिक लगाती न बाल खोलकर बाहर खड़ी होती न वो मुझे देखता चलता न उसे चोट लगती उस दिन के
मैने कभी लिपिस्टिक नहीं लगाई 😔😔
बाद मै
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