हम अपना समय लडाई झगडा और कलह मे बिता देते हैं जो हमारे लिए अनमोल होता है

एक आदमी को मैने अपनी पत्नी की अर्थी से चिपक कर रोते देखा

मैने देखा की वो इंसान किस तरह अपनी पत्नी की अर्थी से ये कह रहा था की मुझे छोड़कर मत जाओ अब मै तुम्हे कभी कुछ भी नहीं कहूंगा मै नादान था

मै तुम्हे मारता था लेकिन अब तो उस आदमी के रोने का कोई मतलब नहीं था

वो आदमी अपनी पत्नी को मायके मे ही रखता था अपने घर लाता था अपने माँ बाप की सेवा के लिए

मारता था पीटता भी था हर समय उसे अपनानीत करता था कहता था की तुम मेरे लायक नहीं हो मुझे पसंद नहीं हो

तुम्हारे माँ बाप ने मुझे पैसा नहीं दिया कितना पैसा मिल रहा था

और वो बेचारी अकेले कमरे मे रोती रहती

सारे दिन सास ससुर की सेवा करती, ननद भी उससे झगडा करती बच्चे भी हुए

लेकिन एक दिन उस महिला को हार्ट अटैक की शिकायत हुई और वो चल बसी

उसके बच्चे आत्मनिर्भर हो चुके थे अब वो आदमी अकेला हो गया था

कितनी सुशील और अच्छी पत्नी की उसने कद्र नहीं की

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