भीगी रातें

एक युवा लड़की जिसका पति विदेश चला जाता है क्या बीतती होगी जब बारात की पहली फुहारें और उसकी महकी महकी सी यादें

उसके पति का हाथ उसके हाथों मे और उसका सिर पति के कंधे पर

पति का उसके बालों को प्यार से सहलाना और कहना बहुत जल्दी आऊंगा और तुम्हे भी अपने साथ ले जाउंगा

अब तो तीन साल बीत गए

उनही ठंडी फुहारो के बीच पति के याद मे खोई हुई मग्न

सिर्फ कल्पना

कुछ समय बाद पता चलता है की पति ने विदेश मे ब्याह कर लिया एक विदेशी गोरी के साथ अब वो नहीं आएगा वो नहीं सहलायेगा उसके बालों को और अब किसका सहारा मिलेगा

कल्पना टूटती है सपने चकना चूर होते हैं उस लड़की के जो एक एक पल अपने पति के इंतजार मे बिताती है

अब

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