आत्मा जीते जी भी तड़पती है किसी की

किसी की भूख से तड़पती आत्मा जो तड़प उसकी आँखों मे दिखाई देती है

तड़पती है उसकी भी आत्मा जो कुर्बानी या बलि के लिए ले जाई जाती है

देख कैसे लेते हो किसी की मृत आत्मा वो तो जब तुम मरोगे तब ही अनुभव होगा

ए अल्लाह ए मौला दिखती है उस बेबस की आँखों मे वो आत्मा जो नूर की तरह आँखों से दिखती है

जिस्म तो यहीं रह जाता है पर उसकी रूह किसी नूर मे मिल जाती है

तड़प उठती है उसकी आत्मा जो सारे आम एक लड़की बाजार मे बिकती है

तार तार हो रही उसकी इज्जत क्या उसकी रूह जीते जी किसी को नहीं दिखती है

अंदाज नहीं लगा सकते उस नौजवाँ का जो पेट की आग बुझाने के लिए दर दर घूमता है रोजगार की तलाश मे क्या उसकी आत्मा तुम्हे नहीं दिखती है

बिलख उठती है उसकी आत्मा जो दहेज की अग्नि मे तानों की बौछार को एक चहारदीवारी मे सहती है क्या उसकी तड़प तुम्हे नहीं दिखती है

इश्क की आग मे कोई जलता हुआ धोखे की लौ मे सुलगा हुआ शख्श क्या तुम्हे नहीं दिखता है

गरीब बूढ़े माँ बाप की आँखों मे, क्या संतानो द्वारा तिरस्कार तुम्हे नहीं दिखता है

मत कहो की आत्मा मरने के बाद ही तड़पती है आज सुलगा रही है जिंदगी को, गरीबी की चादर ओढ़ कर क्या उसकी आत्मा तुम्हे नहीं दिखती है

अंतिम चरण के संस्कार बेहतरीन करने से क्या फायदा

जमीन मे प्यार से किसी को दफनाने से क्या फायदा

करने हो तो करो सबकी मदद, मरने के बाद कौन किसकी आत्मा की तड़प को देखता है आँखे भी हो जाती है बंद, शरीर की हलचल भी त्याग देती है अपने लिबास को 🌹🌹😔😔🌹🌹😔

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