जब आप थोड़ी थोड़ी बात पर रोने लगे तो आप दयालु नहीं कमजोर हैं

मै 52 बर्ष की एक महिला हु लेकिन अब मै इतनी परिपक्व हो चुकी हु की मुझे किसी की बात पर रोना नहीं आता और न ही मै किसी की बातों मे आती हु

मुझे परिस्थिति ने मजबूत किया

एक वो भी समय था जो मेरी गलती न होते हुए भी माफी मांगने चली जाती थी और किसी के भाव को बढ़ा देती थी फिर वो इंसान बाद मे मुझे और तंग करता था

लेकिन आज मै इतनी मजबूत हु की मै कोई गलती करती ही नहीं

मुझे कोई भी कुछ कहता है तो मै उससे बेकार की बहस करके अपना समय बर्बाद नहीं करती और न ही अब तनाव मे आती हु बस उस इंसान से दूरी बना लेती हु बात करना बेहद कम कर देती हु और उसे अपने जीवन मे महत्व नहीं देती

सबसे बड़ी बात ये है की मै अब किसी पर भी जल्दी दया नहीं खाती अगर मेरे पास 20 रू हैं तो मैं पहले अपने बारे मे सोंचती हु की अगर मै इसे दे दूंगी तो मैं बाद मे क्या करूँगी

सबसे बड़ी बात की मेरे मन मे अब डर खत्म हो गया की ये अगर नाराज हो गया तो मेरा साथ कौन देगा तो वो इंसान मेरा साथ क्या देगा जो मेरी आत्मा को चोट पहुंचाता है 😔😔

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