छोड़ कर अपना शरीर, जब कभी वो मेरा मेरा करता था
अपने आप पर गुरूर करता था
अपनी काबलियत पर नाज़ करता था
महल बनाया था जैसे संगमरमर का जैसे
एकत्र किये थे कागज के नोट और हीरे मोती
पर जब शरीर छुटा, तो देखा उसके अपने अंतिम क्रिया के करने से पहले उसकी संपत्ति का बंटवारा किस तरह कर रहे थे
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