अच्छा अच्छा चलो अब काम आगे बढ़ाओ सबके खाने पीने का इंतजाम भी करना है
तुमको पता है की सरदार अबकी बार इतना लूट कर लाएंगे की हम सब आराम से खाएंगे सबको पुरस्कार मिलेगा
अच्छा अब जाओ कपड़े धो लो उस महिला की तबियत खराब है मै भी धुलवा लेता हु कपड़े
उस नदी पर रखे हैं वहाँ पर बहुत पानी भी है यहाँ कहाँ भरकर लाएंगे
वीरसिंह और वो आदमी कपड़े धोने चले जाते हैं
सुरुचि एक जगह चुपचाप लेटी हुई थी
तभी वीर सिंह देखते हैं की वहाँ पर कोई नहीं है
अब वे उस आदमी से पूंछते हैं की तुम लोग यहाँ क्या करते हो
वो आदमी कहता है की मै और मेरी पत्नी यहाँ पर बंदी की तरह रहते हैं वे लोग मेरी बेटी को मन्दिर लेकर गए है
मेरी बेटी न जाने किस हाल मे होगी अब
तुम्हारी बेटी बिल्कुल ठीक है मेरा नाम वीर सिंह है क्या तुम लोग मेरे साथ चलोगे हम तुम्हारी मदद करने आये हैं Kra
क्रमशः🌹🌹🌹🌹🌹

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