सुनो कुछ कहना है तुमसे

तुम न आए रात बीत गई

तुम न आए वो बरसात बीत गई

लवों पर है तुम्हारा नाम

तुम्हारे बिना वो खुशियों का मेला

कुछ नहीं बिल्कुल अधूरा सा लगता है

पपीहे की आवाज कहती है

किस तरह भूल जाता है कोई अपने प्यार को

जो निशदिन पुकार पुकार कर कहता है

अब आ जाओ तुमसे कुछ कहना है कुछ कहना है

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें