जब इंसान अंदर से टूट जाता है

जीवन मे सब कुछ न कुछ पाने की होड़ मे लगे रहते हैं
जब उनकी इच्छा पूरी नहीं होती तो सब दुखी होते हैं
अपने आप को उस ही मे झोंक देते हैं, इच्छा एक आग के समान सबके दिलो मे सुलगती रहती है

जब पूरी नहीं होती तो ये आग का रूप ले लेती है और अंदर ही अंदर सबको खाती रहती है कोई इच्छा से अपना मुह नहीं मोड पाता

इच्छा अंदर ही अंदर एक बलवान और एक सुखी और संतुष्ट इंसान को भी पूर्ण रूप से अपने वश मे कर लेती है और यही इच्छा अंदर ही अंदर भायानक रूप धारण कर लेती है एक विशाल अग्नि का रूप ले लेती है और उस इंसान को अंदर ही अंदर जलाती जाती है

और जब इंसान अंदर से टूट जाता है तो वो इच्छा अपना रुख भी बदल लेती है🙏🙏😔🙏

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